अहमद सलमान: जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे काव्य डेस्क
“ना पेशी होगी, ना गवाह होगा, अब जो भी हमसे उलझेगा बस तबाह होगा।”
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तू जब से मिला है, हर दर्द चला गया,तेरे प्यार में ही मेरा सुकून छुपा है। ❤️
हम से टकराने की गलती मत करना,क्योंकि आग से खेलने वालों की राख बनते देर नहीं लगती।
ना ताज चाहिए, ना तख्त की हुकूमत,हम तो अपनी नज़रों में बादशाह हैं।
मनोहर नेत्रों से दो बूंद नीर उसपर गिराकर
हुस्न वाले जब ♀️तोड़ते हैं दिल किसी का# !#बड़ी मासूमियत से कहते हैं# मजबूर थे हम
ना शिकायत है ना कोई गिला,बस अब अकेले जीना भी लगने लगा है सिला।
“मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में।
तेरी बेवफ़ाई ने कुछ ऐसा सिखा दिया,अब मोहब्बत नाम सुनते ही डर लगता है।
तेरे इश्क़ में इतना क्यूट बन गया हूँ मैं,अब आइने भी मुझसे जलने Trending Shayari लगे हैं।
भवानीप्रसाद मिश्र: मैं जो हूँ मुझे वही रहना चाहिए काव्य डेस्क